Namo jinanam

img

जानिए रहस्य

अपनी मानवता, अपना धर्म, अपना स्वास्थ्य, अपना पुण्य और अपनी सुख व शांति ही अपना सब कुछ है और वह हमारे स्वयं के हाथों में है। पढ़े और जानें E No. का रहस्य, फास्ट फूड का रहस्य, कहीं ये सब मांसाहार तो नहीं।

img

छांछ के गुण (chaas ke gun)

1.छाछ में विटामिन 'B12', कैलशियम, पोटेशियम और फास्फोरस जैसे तत्व होते हैं जो बहुत लाभदायक होते हैं यह हाजमा सुधारती है और कोलेस्ट्रोल को कम करती है। जिन्हें दूध हजम नहीं होता उन्हें छाछ पीनी चाहिए।
 2.छाछ नाश्ते के साथ तथा दिन के भोजन के बाद नियमित रूप से पीनी चाहिए इससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है रात के समय छाछ नहीं पीनी चाहिए अन्यथा एसिडिटी या पेट की परेशानी हो सकती है शाम के समय इसे पिया जा सकता है।
3.छाछ की तुलना अमृत से की गई है इसी से इसका महत्व पता चलता है यह शरीर में विजातीय तत्व और विषैले तत्वों को निकालकर रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाती है।
 4.छाछ पीने से संग्रहणी, खांसी और  बवासीर आदि रोग मिट जाते हैं।
 5.छाछ का नियमित सेवन शरीर को पुष्ट, बलवान और सुदृढ़ बनाता है। यह चेहरे को कांतिवान व खूबसूरत बनाती है। यह शरीर पर अनावश्यक चर्बी चढ़ने से रोकती है।
 6.छाछ पीने से शरीर की जलन शांत होती है गर्मी के मौसम में ताजगी और तरावट देने में इसके जैसा कोई  पेय नहीं हो सकता अतः इसका रोज सेवन करना चाहिए।
 7.एक गिलास के साथ एक चम्मच त्रिफला पाउडर कुछ दिन लेने से मोटापा कम हो जाता है।
8. छोटे बच्चों को दांत निकलते समय थोड़ी ताजा छाछ रोज पिलाने से दांत आसानी से निकलते हैं।
 9.एक गिलास छाछ में सेंधा नमक जीरा काली मिर्च और पुदीना मिलाकर पीने से आंतों की सूजन दूर हो जाती है।
 10.विटामिन और खनिज से समृद्ध होने के साथ ही अच्छे पाचन में छाछ उपयोगी होती हैं।
 11.अरुचि, मंदाग्नि और अतिसार में छाछ को अमृत के समान मानते हैं।

img

आंवले के गुण (amla ke gun)

1. आंवला वात- पित्त- कफ अर्थात त्रिदोष नाशक होता है यह चाहे सूखा हो या हरा इसके सेवन से लाभ मिलता है सभी फल व सब्जियां को उबालने व पकाने पर विटामिन कम हो जाते हैं लेकिन आंवला के विटामिन उबालने पर भी नष्ट नहीं होते हैं ।
2. आंवले के पत्ते शतपत्र कहलाते हैं और पूजा में काम में लाए जाते हैं। 3. 3. इसकी जड़ व लकड़ी का उपयोग चंदन के स्थान पर किया जाता है।
4. एक ताजे आंवले में एक नारंगी की अपेक्षा 20 गुना अधिक विटामिन सी रहता है अर्थात् दो बड़ी नारंगी, एक नींबू, चार केले में जितना विटामिन सी मिलता है उतना अकेले एक आंवले में मिल जाता है। यह शरीर के तंतुओं को शक्ति व स्वास्थ्य प्रदान करता है्, शरीर को रोगाणुओं के आक्रमण से बचाता है, यकृत व पित्ताशय की कार्यों को सुचारू रूप से चलने में मदद करता है, बुढ़ापा दूर करता है, शरीर की जीवन शक्ति को बढ़ाता है, दांतों में मसूड़ों को वज्र के समान सुदृढ़ बनाता है।
5. आंवले का रस पीने से मंदाग्नि ठीक हो जाती है।
6. आंवला रक्तशोधक, रुचिकारक, ग्राही मूत्रल है। इसी से यह अजीर्ण, अतिसार, प्रमेय, कब्ज, पांडू व क्षय रोगों का शमन करता है। यह मस्तिष्क व हृदय को शक्ति देता है। आंखों की ज्योति को भी बढ़ाता है।
7.पित्त से वायु का गोला उठने लगे तो हरड़ के काढ़े में आंवले व गन्ने का रस बराबर ले, इस मिश्रण को एक चौथाई घी में मिलाकर हल्की आंच पर पकाने पर सेवन करने से वायु का गोला ठीक हो जाता है।
8. आंवले का चूर्ण घी व शक्कर के साथ सुबह सेवन करने से उसके बाद गाय का दूध पीने से सिर दर्द का निवारण हो जाता है।
9. यदि बचपन के दांत ठीक से न निकल रहे हो, कीड़े लगे हो तो उन्हें रोज ताजा आंवला खाना चाहिए इससे दांत संबंधी सभी रोग दूर हो जाते हैं।
 10.आंवले का मुरब्बा खाकर गाय का दूध पीने से ह्रदय रोग में आराम मिलता है।

Our Experiences

  • हमने तीर्थंकरों को तो देखा नहीं है किंतु आचार्य श्री वसुनंदी जी गुरुवर हमारे लिए भगवान ही हैं।हे भगवन्! आपका हाथ सदैव हमारे सिर पर रहे।

    निकुंज जैन, दिल्ली
    सरक्षंक -अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान, भारत(रजि.)

  • चित्रण क्या करूं उनका जिनका जीवन खुद एक विश्लेषण है, लाखों की भीड़ में बने वो पथ प्रदर्शक हैं,
    धारण कर वैराग्य, त्याग दिया जिसने संसार हैं,
    न राग, न द्वेष, कलह का करे जो तिरस्कार है,
     पूरी दुनिया करती जिन्हें शत शत नमस्कार है,
    वीर रथ पर चलने वाले वह हमारे गुरुदेव हैं,
    करता हूं मैं आपको नमोस्तु बारंबार,
    नमोस्तु गुरुवर। नमोस्तु गुरूवर।

  • मेरे गुरूवर मेरे प्रभु  १०८  आचार्य वसुनन्दी जी को नमन। आचार्य परमेष्ठी आप संयमी,रत्नत्रय से युक्त, क्षमाभाव धारक ,धर्मोंपदेष्टा ,महान चिन्तक ,नाना विद्याओं में निपुण विविध भाषाओं के ज्ञाता हैं। देश समाज के सर्व हितकारी ,मनुष्य की अन्तर्निहित शक्तियों का विकास करने में पूर्ण सक्षम हे गुरूवर आपका आशीर्वाद हम सभी पर सदैव बनाए रखें ऐसी प्रार्थना है।   नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु।

    रमेशगर्ग जैन  (रिटायर आई.पी.एस. अधिकारी)

  • मेरे जीवन के  क्षण- क्षण को, शरीर के रोम -रोम को प्रत्येक शब्द, विचार एवं भाव को वात्सल्य पूर्वक आशीर्वाद से प्रभावित करने वाले गुरुदेव को कोटि-कोटि नमन।

    डॉ. नीरज जैन

  • Aacharya Shri Vasunandi muniraj is a leading Digamber ascetic saint who is spreading his fragrance with his deep knowledge of Jain religion and writings. He is the guiding light and lifeline for all his followers. He shows us simple ways of living life leading to enlightenment.

    Dr. Veena Jain

  • वात्सल्य रत्नाकर मम् गुरु परम पूज्य आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज हम सभी आपके असीम वात्सल्य से उपकृत है हम सभी के ऊपर आपके वात्सल्य की अनुपम कृपा बरसती रहे
    गुरु चरण चच्यरीक
    पं.मनोज कुमार शास्त्री