Namo jinanam

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दृष्टि दृश्यों के पार (drishti drishyon ke par)

प्रस्तुत कृति "दृष्टि दृश्यों के पार" आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के जीवन पर आधारित काव्यकृति जन्म से लेकर एलाचार्य पद तक यात्रा कराते हुए, मुख्य- मुख्य बिंदुओं पर नजर कराती है। जहां आज तक भक्तों की दृष्टि नहीं गई उस दृश्य से परे का बोध कराने में समर्थ यह कृति गुरु भक्ति में रचित लघु, काव्य रूप, आनंद युक्त, भक्ति रस से परिपूर्ण, सरल और ज्ञानवर्धक, भाषा में है।
 नोट- यदि आप भी पूज्य आचार्य श्री के बारे में जानना चाहते हैं तो इस कृति को अवश्य पढ़ें।

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स्मृति पटल से भाग-1 (smriti patal se part-1)

प्रस्तुत कृति "स्मृति पटल से भाग-1" में परम पूज्य आचार्य भगवन् श्री वसुनंदी जी मुनिराज के जीवन के कुछ प्रसंगों को, संस्मरणों को लिपिबद्ध किया गया है,जो कि विशुद्धि व वैराग्य का संवर्धन करने वाले हैं। चेतना में विश्वास और धर्म में स्थिरता प्रदान करने वाले हैं। इन्हें पढ़कर बहुत आनंद उत्पन्न होता है क्योंकि ये बहुत रोचक व प्रेरक हैं।

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स्मृति पटल से भाग-2 (smriti patal se part-2)

प्रस्तुत कृति "स्मृति पटल से भाग-2" में परम पूज्य आचार्य भगवन् श्री वसुनंदी जी मुनिराज के कुछ संस्मरण उल्लिखित हैं। जिनके माध्यम से गुरु के विषय में और अधिक जानने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इन प्रसंगों से जीवन में नवीन अनुभव और प्रेरणा भी प्राप्त होती है। इसे पढ़कर व्यक्ति अपने जीवन की दिशा व दशा समीचीन कर सकते हैं।

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हस्ताक्षर (hastaakshar)

प्रस्तुत कृति "हस्ताक्षर" में कविताओं का संकलन है। ऐलक श्री विज्ञान सागर जी महाराज ने परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के 50वें जन्मोत्सव पर उनके गुणानुराग से निज भक्ति व श्रद्धा से ओतप्रोत जिन कविताओं की रचना की वे सचमुच अत्यंत अनुपम हैं, पठनीय व आनंददायक हैं।

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अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी (abhikshan gyanopyogi)

प्रस्तुत कृति "अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी" के संकलन कर्ता ऐलक श्री विज्ञान सागर जी महाराज हैं। इसमें विभिन्न विद्वान् , साहित्यकार आदि के द्वारा आचार्य श्री के प्रति अपनी भक्ति भावना को शब्दों की पोषाक पहनाकर लिपिबद्ध किया गया है।

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स्वर्णोदय (svarnoday)

प्रस्तुत कृति "स्वर्णोदय" के रचयिता ऐलक श्री विज्ञान सागर जी महाराज हैं। इस कृति में, पूरा विश्व जिसका यशोगान कर रहा है, ऐसे आचार्य भगवन् श्री वसुनंदी जी महाराज का गुणगान करने वाले अत्यंत सुंदर मुक्तक हैं।

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स्वर्ण जन्म जयंती महामहोत्सव (svarn janm jayantee mahamahotsav)

परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के 50वें जन्मोत्सव पर प्रकाशित प्रस्तुत कृति "स्वर्ण जन्म जयंती महोत्सव" में विभिन्न कवियों आदि के उद्गार मुक्तक, कविता वा भजन रूप में प्रस्तुत हैं। जिसका संपूर्ण संकलन ऐलक श्री विज्ञान सागर जी महाराज द्वारा किया गया है।

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अक्षर शिल्पी (Akshar Shilpi)

प्रस्तुत कृति "अक्षर शिल्पी "  में आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज ससंघ का परिचय संकलित है। आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज व उनके संघ का परिचय प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत पुस्तक "अक्षर शिल्पी " अवश्य पढ़ें।

Our Experiences

  • हमने तीर्थंकरों को तो देखा नहीं है किंतु आचार्य श्री वसुनंदी जी गुरुवर हमारे लिए भगवान ही हैं।हे भगवन्! आपका हाथ सदैव हमारे सिर पर रहे।

    निकुंज जैन, दिल्ली
    सरक्षंक -अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान, भारत(रजि.)

  • चित्रण क्या करूं उनका जिनका जीवन खुद एक विश्लेषण है, लाखों की भीड़ में बने वो पथ प्रदर्शक हैं,
    धारण कर वैराग्य, त्याग दिया जिसने संसार हैं,
    न राग, न द्वेष, कलह का करे जो तिरस्कार है,
     पूरी दुनिया करती जिन्हें शत शत नमस्कार है,
    वीर रथ पर चलने वाले वह हमारे गुरुदेव हैं,
    करता हूं मैं आपको नमोस्तु बारंबार,
    नमोस्तु गुरुवर। नमोस्तु गुरूवर।

  • मेरे गुरूवर मेरे प्रभु  १०८  आचार्य वसुनन्दी जी को नमन। आचार्य परमेष्ठी आप संयमी,रत्नत्रय से युक्त, क्षमाभाव धारक ,धर्मोंपदेष्टा ,महान चिन्तक ,नाना विद्याओं में निपुण विविध भाषाओं के ज्ञाता हैं। देश समाज के सर्व हितकारी ,मनुष्य की अन्तर्निहित शक्तियों का विकास करने में पूर्ण सक्षम हे गुरूवर आपका आशीर्वाद हम सभी पर सदैव बनाए रखें ऐसी प्रार्थना है।   नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु।

    रमेशगर्ग जैन  (रिटायर आई.पी.एस. अधिकारी)

  • मेरे जीवन के  क्षण- क्षण को, शरीर के रोम -रोम को प्रत्येक शब्द, विचार एवं भाव को वात्सल्य पूर्वक आशीर्वाद से प्रभावित करने वाले गुरुदेव को कोटि-कोटि नमन।

    डॉ. नीरज जैन

  • Aacharya Shri Vasunandi muniraj is a leading Digamber ascetic saint who is spreading his fragrance with his deep knowledge of Jain religion and writings. He is the guiding light and lifeline for all his followers. He shows us simple ways of living life leading to enlightenment.

    Dr. Veena Jain

  • वात्सल्य रत्नाकर मम् गुरु परम पूज्य आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज हम सभी आपके असीम वात्सल्य से उपकृत है हम सभी के ऊपर आपके वात्सल्य की अनुपम कृपा बरसती रहे
    गुरु चरण चच्यरीक
    पं.मनोज कुमार शास्त्री