
Padam Puran Part-1
सातवीं शताब्दी के आचार्य भगवन् श्री रविषेण द्वारा रचित यह पद्मपुराण नामक संस्कृत ग्रंथ श्रेष्ठ महाकाव्य में से एक है। इसके प्रथम भाग में 25 पर्वों में राक्षस वंश का सविस्तार वर्णन है। रावण का प्रभाव, विवाह, पुत्र आदि का वर्णन है। बाली, सुग्रीव, नल, नील आदि की उत्पत्ति, रावण की दिग्विजय, हनुमान कथा, मुनिसुव्रतनाथ व उनके वंश, इक्ष्वाकु वंश एवं दशरथ का विवाह व संतान उत्पत्ति का वर्णन है।

Padam Puran Part-2
पद्मपुराण के द्वितीय भाग में 26वें पर्व से 65वें पर्व तक सीता व भामंडल के पूर्व भव, नारद द्वारा सीता से बदला लेना, राम,लक्ष्मण,भरत आदि का विवाह, राजा दशरथ का वैराग्य,दशरथ के पूर्व भव, राम के राज्याभिषेक की घोषणा, केकया मां का वर,भरत का राज्य अभिषेक,राम का वन गमन, राजा वज्रकर्ण, संपूर्ण वन यात्रा एवं देशभूषण कुलभूषण मुनियों का वर्णन है। गुप्ति सुगुप्ति मुनि को आहार दान, लंका वर्णन, विद्या सिद्ध करते शंबूक का वध, चंद्रनखा द्वारा माया, खरदूषण की मृत्यु, सीता हरण, सुग्रीव व राम मिलन, हनुमान द्वारा सीता के समाचार प्राप्त कर राम को देना, राम लक्ष्मण रावण का युद्ध,लक्ष्मण को शक्ति लगना, विशल्या द्वारा दूर होना, विवाह होना आदि का विस्तृत वर्णन है।

Padam Puran Part-3
पद्मपुराण के तृतीय भाग में 65वें पर्व से 123 वें पर्व तक रावण द्वारा बहुरूपिणी विद्या की सिद्धि, रावण का युद्ध हेतु जाना, अपशकुन होना, रावण लक्ष्मण का युद्ध, लक्ष्मण द्वारा रावण का वध, अनंतवीर्य मुनि का लंका आगमन, केवल ज्ञान उत्पन्न होना, इंद्रजीत आदि द्वारा पूर्व दीक्षा लेना और मंदोदरी आदि का आर्यिका दीक्षा लेना, राम लक्ष्मण का लंका प्रवेश, अयोध्या लौटना त्रिलोकमंडल हाथी का भरत के समक्ष शांत होना, भरत की दीक्षा और निर्वाण, राजा मधु को पराजित कर शत्रुघ्न का मथुरा पर राज्य करना, सप्त ऋषि का वर्णन, सीता के स्वप्न, दोहला, लोकापवाद, राम द्वारा सीता का त्याग, राजा वज्रजंघ के यहां सीता द्वारा पुत्र जन्म, लव कुश का राम लक्ष्मण से युद्ध, पुनः सिद्धार्थ द्वारा रहस्य का प्रकटीकरण, सीता की अग्नि परीक्षा, आर्यिका दीक्षा ग्रहण करना, लवण अंकुश चरित्र, भामंडल मृत्यु, हनुमान द्वारा दीक्षा, लक्ष्मण की मृत्यु, राम का वैराग्य दीक्षा व मोक्ष का वर्णन है।