Namo jinanam

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शिवपथ का रथ (Shiv Path ka Rath)

प्रस्तुत कृति "शिवपथ का रथ" में 10 वीं शताब्दी के परम पूज्य आचार्य श्री अमितगति स्वामी द्वारा विरचित द्वात्रिंशतिका अपरनाम सामयिक पाठ के संस्कृत के 32 उपजाति छंदों पर आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज द्वारा जयपुर चातुर्मास में की गई मार्मिक वाचना को विधिवत् लिपिबद्ध किया गया है। लगभग 36 प्रवचनों में समय का संपूर्ण सार समाहित कर दिया गया है।

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बोधिवृक्ष (bodhi vrksh)( prashnottar ratnamaalika vachana)

प्रस्तुत कृति 'बोधि वृक्ष' अजमेर चातुर्मास 2014 में आचार्य गुरुवर श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा आचार्य भगवन् श्री अमोघवर्ष स्वामी जी द्वारा रचित प्रश्नोत्तर रत्नमालिका पर की गई प्रवचनों की माला है। 21 दिनों की वाचना का प्रस्तुतिकरण इस कृति में किया गया है। अल्पकाय ग्रंथ को प्रवचनों के माध्यम से अल्पमति वालों के लिए भी बहुपयोगी और सरल बना दिया है, जिससे आबाल वृद्ध सभी स्वाध्याय कर सकते हैं।

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स्वात्मोपलब्धि (swatmopalabdhi)

प्रस्तुत ग्रंथ "स्वात्मोपलब्धि" आचार्य भगवन् श्री पूज्यपाद स्वामी द्वारा रचित समाधितंत्र पर परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य गुरुवर श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा 2017 में ग्रीन पार्क दिल्ली में चातुर्मास के दौरान ली गई अनुपम वाचना है। इसमें अध्यात्म रस का प्रवाह करने वाले 105 श्लोक हैं। शुद्धात्मा के स्वरूप का प्रतिपादन करने वाला यह चिंतन की विधि का अनूठा ग्रंथ है। आध्यात्मिकता क्या है? अध्यात्म विज्ञान, भेद विज्ञान क्या है? वह कैसे प्राप्त हो? इत्यादि को समझने के लिए हमारी दृष्टि में यह सर्वोत्कृष्ट ग्रंथ है।

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रत्नकरंड श्रावकाचार ( ratna karand shravakachar)

यह 'रत्न करण्ड श्रावकाचार' नामक ग्रंथ द्वितीय शताब्दी के आचार्य भगवन् श्री समंतभद्र स्वामी द्वारा रचित है। इसमें श्रावक जीवन का संविधान निहित है। इस ग्रंथ में 'श्रावक धर्म संहिता' नाम से आचार्य श्री वसुनंदी जी गुरुदेव के रत्न करंड श्रावकाचार पर हुए प्रवचनों का संकलन है। आचार्य श्री ने श्रावकों के आचार का बहुत सरल शब्दों में वर्णन किया है। श्रावक के सही स्वरूप को जानने के लिए यह ग्रंथ जिनशासन में प्रसिद्ध है। जैन श्रावक को यह ग्रंथ पढना ही चाहिए।

Our Experiences

  • हमने तीर्थंकरों को तो देखा नहीं है किंतु आचार्य श्री वसुनंदी जी गुरुवर हमारे लिए भगवान ही हैं।हे भगवन्! आपका हाथ सदैव हमारे सिर पर रहे।

    निकुंज जैन, दिल्ली
    सरक्षंक -अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान, भारत(रजि.)

  • चित्रण क्या करूं उनका जिनका जीवन खुद एक विश्लेषण है, लाखों की भीड़ में बने वो पथ प्रदर्शक हैं,
    धारण कर वैराग्य, त्याग दिया जिसने संसार हैं,
    न राग, न द्वेष, कलह का करे जो तिरस्कार है,
     पूरी दुनिया करती जिन्हें शत शत नमस्कार है,
    वीर रथ पर चलने वाले वह हमारे गुरुदेव हैं,
    करता हूं मैं आपको नमोस्तु बारंबार,
    नमोस्तु गुरुवर। नमोस्तु गुरूवर।

  • मेरे गुरूवर मेरे प्रभु  १०८  आचार्य वसुनन्दी जी को नमन। आचार्य परमेष्ठी आप संयमी,रत्नत्रय से युक्त, क्षमाभाव धारक ,धर्मोंपदेष्टा ,महान चिन्तक ,नाना विद्याओं में निपुण विविध भाषाओं के ज्ञाता हैं। देश समाज के सर्व हितकारी ,मनुष्य की अन्तर्निहित शक्तियों का विकास करने में पूर्ण सक्षम हे गुरूवर आपका आशीर्वाद हम सभी पर सदैव बनाए रखें ऐसी प्रार्थना है।   नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु।

    रमेशगर्ग जैन  (रिटायर आई.पी.एस. अधिकारी)

  • मेरे जीवन के  क्षण- क्षण को, शरीर के रोम -रोम को प्रत्येक शब्द, विचार एवं भाव को वात्सल्य पूर्वक आशीर्वाद से प्रभावित करने वाले गुरुदेव को कोटि-कोटि नमन।

    डॉ. नीरज जैन

  • Aacharya Shri Vasunandi muniraj is a leading Digamber ascetic saint who is spreading his fragrance with his deep knowledge of Jain religion and writings. He is the guiding light and lifeline for all his followers. He shows us simple ways of living life leading to enlightenment.

    Dr. Veena Jain

  • वात्सल्य रत्नाकर मम् गुरु परम पूज्य आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज हम सभी आपके असीम वात्सल्य से उपकृत है हम सभी के ऊपर आपके वात्सल्य की अनुपम कृपा बरसती रहे
    गुरु चरण चच्यरीक
    पं.मनोज कुमार शास्त्री